Parenting: दोस्‍तों से बात करने से रोकेंगे तो बन जाएंगे विलेन, अपने बच्‍चे को बिना बताएं ऐसे करें कंट्रोल


Lifestyle Desk, New Delhi
. सोशल मीडिया एक पॉवरफुल टूल है जिससे आप अपनी बातों को व्‍यक्‍त कर सकते हैं और दूसरों और अपनी रुचियों को शेयर कर सकते हैं। आजकल टीनएजर बच्‍चों के लिए भी सोशल मीडिया कनेक्‍ट रहने और कम्‍युनिकेट करने का एक अहम जरिया बन गया है। इससे बच्‍चे अपने दोस्‍तों और साथियों से जुड़े रह पाते हैं। टीनएज उम्र में बच्‍चे ऐसे कई ग्रुप चैट्स में भी इनवॉल्‍व होते हैं, जिन्‍हें लेकर अक्‍सर पैरेंट्स को चिंता सताती है।

जी हां, सोशल मीडिया के फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं और हर पैरेंट को इससे होने वाले नुकसान को लेकर चिंता रहती है। अगर बच्‍चों और पैरेंट्स के बीच ओपन कम्‍युनिकेशन हो, तो इस तरह की स्थिति को आसानी से दूर किया जा सकता है।

अगर आप भी अपने टीनएज बच्‍चे की ग्रुप चैट को लेकर परेशान रहते हैं, तो इस आर्टिकल में जान सकते हैं कि आपको उसके सा‍थ कैसे डील करना चाहिए।

खुलकर बात करने की जगह रखें

आप दोनों के बीच आपसी समझ इतनी अच्‍छी होनी चाहिए कि वो आपसे खुलकर अपने मन की बात कह सके और अपनी परेशानियों को आपके साथ शेयर कर सके। इसके अलावा बच्‍चे को यह एहसास होना चाहिए कि आप उसकी बात सुनकर उसे जज नहीं करेंगे। आपका बच्‍चा आपसे अपने ऑनलाइन एक्‍सपीरियंस पर बात करने में कंफर्टेबल होना चाहिए। उससे पूछें कि वो ग्रुप चैट में किस टॉपिक पर बात करता है या वो ग्रुप बनाने का क्‍या उद्देश्‍य है। अपनी चिंता व्‍यक्‍त करने से पहले उसकी बात सुन लें।

ऑनलाइन सेफ्टी के बारे में बताएं

आप अपने टीनएज बच्‍चे को ऑनलाइन जोखिमों के बारे में भी बताएं। इसमें साइबरबुलिंग, गलत कंटेंट या हानिकारक चुनौतियां शामिल हैं। बच्‍चे को सही उदाहरण देकर समझाएं और उसे एक जिम्‍मेदार डिजीटल बिहेवियर अपनाने की सीख दें। उसे बताएं कि उसे ऑनलाइन ऐसे ही किसी से भी अपनी निजी जानकारी शेयर नहीं करनी है और उसे मैसेजिंग ऐप्‍स पर प्राइवेसी सेटिंग के बारे में भी बताएं।

रियलिस्‍टिक बाउंड्री बनाएं

बच्‍चे को ऑनलाइन बिहेवियर के दिशा-निर्देश बताएं। उसे भाषा, कंटेंट और डिजीटल प्‍लेटफॉर्म पर लोगों से बात करने के तरीके और लिमिट के बारे में बताएं। ऑनलाइन एक्टिविटीज के लिए सक टाइम भी सेट कर के रखें और उसे ऑफलाइन एक्टिविटीज, होमवर्क और नींद का महत्‍व भी समझाएं।

पैरेंटल कंट्रोल

अगर आपको जरूरत लगती है, तो आप बच्‍चे के डिवाइस या मैसेजिंग ऐप्‍स को मॉनिटर करने के लिए पैरें‍टल कंट्रोल फीचर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, आपको इसके साथ बच्‍चे की प्राइवेसी का भी ध्‍यान रखना चाहिए। बच्‍चे से उसके ऑनलाइन एक्‍सपीरियं, चुनौतियों और अगर कोई चिंता की बात है, तो उसके बारे में पूछते रहें।

उनका सपोर्ट बनें

किशोरावस्‍था एक ऐसी उम्र है जिसमें बच्‍चे का सामाजिक दायरा बढ़ने लगता है और वो ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर लोगों से बातें करना शुरू करता है। आपको बच्‍चे की सोशल लाइफ को समझना और कोई गलती होने पर उसे सपोर्ट करने के लिए खड़े रहना होगा।

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