मालदीव को ऐसे निगल रहा ड्रैगन! कर्ज लेकर अपने देश को अगला 'श्रीलंका' बना रहे मुइज्जू? - Maldives and China


Foreign Desk, नई दिल्ली:
भारत से विवाद के बीच मालदीव (Maldives) के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohamed Muizzu) चीन के दौरे पर हैं. इस दौरान मुइज्जू ने बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) से मुलाकात की. भारत के विरोध में मुइज्जू चीन को मालदीव का पुराना दोस्त बता रहे हैं. चीन भी मौजूदा विवाद को देखते हुए अपना प्रभाव बढ़ाने में लगा है. वह बढ़चढ़ कर मालदीव की आर्थिक मदद की बात कर रहा है. लेकिन, चीन के साथ जाने में सबसे बड़ा नुकसान मालदीव का ही है. क्योंकि मालदीव धीरे-धीरे चीन के कर्ज के जाल में फंस चुका है. मालदीव पर चीन का इतना कर्ज बढ़ चुका है कि इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने मालदीव को भुगतान संकट की चेतावनी दी है.

चीन पहले भी कर्ज के जाल में कई देशों को फंसा चुका है. चीन के कर्ज जाल में फंसने वाला हालिया देश श्रीलंका है. मालदीव का पड़ोसी श्रीलंका वास्तव में चीनी कर्ज के जाल में फंसकर ही डिफॉल्टर (दिवालिया) हो गया. अब मालदीव भी इसी राह पर है. 

IMF के मुताबिक, मालदीव पर चीन का 1.37 बिलियन डॉलर यानी 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. ये रकम मालदीव के कुल कर्ज का 20% है. चीन के बाद मालदीव को कर्ज देने वालों में दूसरे नंबर पर सऊदी अरब और तीसरे नंबर पर भारत है. मालदीव के 2014 में BRI में शामिल होने के बाद वहां चीनी कंपनियों का निवेश बढ़कर 1.37 बिलियन डॉलर हो चुका है.

वित्तीय व्यवस्था और देनदारी संकट का बढ़ता खतरा

मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू चीन से निवेश की अपील कर रहे हैं. वहीं, चीन ने अपने कर्ज की रिकवरी का दबाव बनाना शुरू कर दिया है. अक्टूबर में आई IMF की रिपोर्ट में मालदीव को चीन से और कर्ज़ लेने से सावधान किया गया है. IMF की रिपोर्ट में कहा गया है कि मालदीव की वित्तीय व्यवस्था और देनदारी संकट में पड़ सकती है. IMF के आंकड़ों के मुताबिक, मालदीव की जीडीपी 4.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की है. कर्ज अदायगी को लेकर बड़ा संकट हो सकता है. 

राष्ट्रपति मुइज्जू ने कर्ज चुकाने की मांगी मोहलत

रिपोर्ट के मुताबिक, मुइज्जू ने कर्ज चुकाने के लिए और मोहलत मांगी है. मुइज्जू ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अनुरोध किया है कि कर्ज अदायगी को नए सिरे से तय किया जाए. अगले पांच साल में कर्ज भुगतान के लिए मोहलत भी मांगी गई है. इस सिलसिले में दोनों देशों के बीच बातचीत जल्द शुरू होगी.

एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुताबिक, मालदीव के कुल कर्ज का 60 फीसदी चीन डेवलपमेंट बैंक, इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना से मिला है. मालदीव की आर्थिक वृद्धि 2023 में 7.1 फीसदी है, जो 2022 में 13.9 फीसदी थी. 

 20 समझौतों पर हुए साइन

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना 2014 में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल होने के फैसले के बाद से चीनी कंपनियों ने मालदीव में 1.37 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा इंवेस्टमेंट किया है. इसी दिशा में मुइज्जू की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 20 समझौतों पर साइन किए. 

मुइज्जू श्रीलंका से सीख लेने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने अपने पहले चीन दौरे में 130 मिलियन की मदद और हासिल की है. इसे मालदीव के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में खर्च किया जाएगा. इसमें माले में सड़क निर्माण भी शामिल है. 50 मिलियन की मदद हुलहुमाले में टूरिज़्म के विकास के लिए दिया गया है. चीन मालदीव को 100 बिस्तर वाले अस्पताल के लिए भी अनुदान देगा.

पूर्व उपराष्ट्रपति ने भी चेताया

मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद अदीब ने चीन पर मालदीव की बढ़ती निर्भरता के प्रति आगाह किया है. उन्होंने कहा है कि हालात श्रीलंका जैसे हो सकते हैं. श्रीलंका ने चीन से खूब कर्ज लिए. उस पर विदेशी कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया कि उसे चुकाने की समस्या पैदा हो गई. विदेशी भुगतान बंद होने से ज़रूरी सामानों का आयात बंद हो गया. इससे पूरे देश में हाहाकार मच गया. जिसके बाद राष्ट्रपति को देश छोड़ कर भागना पड़ा था. 

भारत मालदीव को देता रहा है मदद

दूसरी तरफ, भारत मालदीव को सतत रूप से आर्थिक मदद देता रहा है. भारत ने माले एयरपोर्ट के विकास के लिए 134 मिलियन डॉलर का कर्ज दिया था. मालदीव और भारत के बीच कई तरह के रक्षा समझौते हैं. भारत के 88 सैनिक मालदीव में हैं, जो वहां ट्रेनिंग और रेस्क्यू जैसे काम को अंजाम देते हैं. स्वास्थ्य सुविधा के लिए हेलिकाप्टर सेवा भी भारत की ओर से मुहैया कराया जाता है. हालांकि, मुइज्जू ने अब भारत से सेना वापस लेने को कहा है.

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