लैंड फॉर जॉब मामले में बढ़ीं लालू परिवार की मुश्किलें! राबड़ी देवी और मीसा भारती सहित हेमा यादव को समन, पेशी की तारीख फिक्सland-for-job-case-summons

 


लालू प्रसाद यादव का परिवार मुश्किलों में घिरता दिख रहा है। उधर, तेजस्वी यादव और बाकी पार्टी नीतीश कुमार के सियासी गुगली को संभालने में जुटी है। लगातार पटना में बैठकों का दौर जारी है। दूसरी ओर जमीन के बदले नौकरी मामले में ईडी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। ईडी ने राबड़ी देवी, मीसा भारती, हृदयानंद चौधरी को आरोपी बनाते हुए समन जारी किया है। इसके अलावा ईडी ने दो अन्य कंपनियों को भी आरोपी बनाया है। ईडी ने इस मामले में चार हजार से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव सहित हृदयानंद चौधरी को समन जारी किया है।

दो कंपनियों को समन

कोर्ट ने इसके साथ ही अमित कात्याल और दो कंपनियों के खिलाफ भी समन जारी किया है। कोर्ट ने 9 फरवरी की तारीख को पेशी के लिए फिक्स कर दिया है। लालू परिवार पर ये संकट तब आया है, जब पूरा परिवार इन दिनों बिहार में सत्ता बचाने में जुटा हुआ है। राबड़ी आवास पर बैठकों का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने राजद नेताओं से कहा है कि खेला तो अभीअब शुरू हुआ है। कहा जा रहा है कि जीतन राम मांझी को तेजस्वी यादव साधने में जुटे हुए हैं। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है।कोर्ट ने जारी किया समन

इससे पूर्व ईडी ने लैंड फॉर जॉब घोटाले के आरोपों की जांच करते हुए चार्जशीट दाखिल किया था। इस पर आज ही सुनवाई हुई। उसके बाद कोर्ट ने समन जारी किया है। अमित कत्याल इस मामले में अभी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के जज विशाल गोगने ने आदेश पारित करते हुए कहा कि संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त आधार है। ध्यान रहे कि ये मामला 14 साल पुराना है। इस मामले में रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव पर जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप लगा था। इस मामले में बड़ा घोटाला सामने आया था। इसी मामले को लेकर सीबीआई ने केस दर्ज किया था।

घोटाले का मामला

बिहार में राजनीतिक उठापटक के बीच जारी हुए इस समन को लेकर आरजेडी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अभी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राबड़ी आवास पर बैठक चल रही है। ध्यान रहे कि इस मामले में पहले सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया जाता था। बाद में उसे कंफर्म कर दिया जाता था। नौकरी के बदले कई लोगों से जमीन लिया गया था। बाद में अमित कात्याल ने एक सेल कंपनी बनाकर कई तरह की घपलेबाजी भी की थी।

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