पर्दे के पीछे रहकर राम मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले ये 5 शख्स कौन हैं?


 41 महीने के भीतर अयोध्या राम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के पहले चरण का काम पूरा हो गया. अब ट्रस्ट प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम कराने में जुटा है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इसका न्यौता दिया जा चुका है.

5 अगस्त 2020 को मंदिर के लिए भूमि पूजन भी प्रधानमंत्री मोदी ने ही किया था. इसके बाद ट्रस्ट ने युद्ध स्तर पर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की थी. ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि 3500 मजदूरों और 150 इंजीनियरों के अथक मेहनत के बूते निर्माण का काम समय पर हुआ है.

निर्माण से जुड़े कई चेहरे को टीवी मीडिया और सोशल मीडिया पर खूब दिखाया जा रहा है, लेकिन 5 ऐसे भी चेहरे हैं, जिन्होंने मंदिर निर्माण में पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभाई है. 

इस स्टोरी में इन्हीं 5 लोगों के बारे में विस्तार से जानते हैं...

विनोद कुमार मेहता- विनोद मेहता लार्सन एंड टर्बो (एल एंड टी) के प्रोजेक्ट हेड हैं. राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी इसी कंपनी को दी गई है. मंदिर निर्माण के रिव्यू को लेकर हुई अब तक की सभी मीटिंग में मेहता खुद मौजूद रहे हैं.

हाल ही में राम मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर मेहता का एक बयान खूब वायरल हुआ था. इस बयान के मुताबिक आने वाले एक साल तक राम मंदिर के पत्थरों पर कोई असर नहीं होगा. मेहता के मुताबिक भूंकप से भी कोई खतरा नहीं होगा.

मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले मेहता ने इलाहाबाद से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की है. मेहता के लिंक्डिन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने 1991 में बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर लार्सन एंड टर्बो को ज्वॉइन किया था.

मेहता इससे पहले खाड़ी देशों में लार्सन एंड टर्बो के कई प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं.  इसके अलावा मेहता दक्षिण भारत के कई स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर भी काम कर चुके हैं.

मेहता के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण के लिए करीब 1500 कारिगर और 150 इंजीनियर काम कर रहे हैं.

वीएस राजू- राम मंदिर में कितने पिल्लर होंगे, गर्भ गृह कैसा होगा? यह सब खाका आईआईटी दिल्ली के रिटायर प्रोफेसर वीएस राजू के नेतृत्व वाली एक एक्सपर्ट कमेटी ने तैयार किया.

रिपोर्ट के मुताबिक वीएस राजू की टीम ने मंदिर निर्माण के लिए मुख्यतः 3 चीजों का विशेष ध्यान रखा-

1. मिट्टी किस तरह की है और इसमें किस तरह के मैटेरियल का इस्तेमाल होना चाहिए.

2. अयोध्या का पर्यावरण कैसा है. आने वाले सालों में यह कैसा रहेगा?

3.  पुरातत्व से जो नक्शे मिले हैं, उसमें राम मंदिर का स्ट्रक्चर किस तरह का था?

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही एल एंड टी के इंजीनियर और कारिगरों ने मंदिर का निर्माण किया है.

आईआईसीएससी से इंजीनीयरिंग करने के बाद वीएस राजू ने जर्मनी के कार्लसुरहे यूनिवर्सिटी से डॉक्ट्रेट की पढ़ाई की. आईआईटी दिल्ली में डायरेक्टर बनने से पहले तक वे आईआईटी मद्रास में प्रोफेसर थे.

आंध्र प्रदेश में वे बायराजू फाउंडेशन के भी लीड करते हैं. यह फाउंडेशन 5 जिले के 155 गांव के विकसित करने में जुटा है.

अन्नू भाई सोमपुरा- अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण में लोहे और सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुताबिक मंदिर का निर्माण पत्थरों के जरिए किया गया है. इसके लिए एक खास तरह के पत्थरों के तरासा गया है.

पत्थरों के तरासने का काम अन्नू भाई सोमपुरा के नेतृत्व में किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक पत्थरों को तरासने के लिए कारसेवकपुरम में एक टोली बैठती थी. यहां से सभी तरासे गए पत्थरों को जन्म स्थान पर भेजा जाता था.

मूल रूप से गुजरात के प्रभास पट्टन निवासी अन्नू भाई सोमपुरा 33 साल पहले अयोध्या आए थे. उस वक्त भी उन्होंने पत्थरों के तरासना शुरू किया था. सोमपुरा का पूरा परिवार इसके बाद अयोध्या में ही बस गया.

अन्नू भाई सोमपुरा कहते हैं- शुरू में जब हम अयोध्या आए थे, तो सिर्फ 2 पत्थर यहां पर थे. कारिगर भी यहां आने से पहले डरते थे. हालांकि, हमें यह उम्मीद थी कि यहां एक न एक दिन जरूर राम मंदिर बनेगा.

सोमपुरा के मुताबिक राम मंदिर के निर्माण में जो पत्थर उपयोग में लाया गया है, वो गुलाबी कलर की है. इस पत्थर पर जो नक्कासी की गई है, वो दूर से भी दिख सकती है. 

नृपेंद्र मिश्रा- प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी. मिश्रा इसके बाद से अयोध्या में ही रहकर मंदिर निर्माण कार्य की गतिविधियां को देख रहे थे.

पीएमओ और सीएमओ से आए फीडबैक को इंजीनियर तक पहुंचाने का काम भी मिश्रा की ही टीम कर रही थी. 

समचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखना बड़ी चुनौती थी. हमने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मूर्ति निर्माण तक की प्रक्रिया को गोपनीय रखा. 

मिश्रा ने कहा कि धार्मिक के साथ-साथ यहां सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से विकसित हो, इस पर भी काम किया जा रहा है. 

नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री मोदी का भरोसेमंद माना जाता है. 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो मिश्रा को पीएम कार्यालय का प्रमुख बनाकर लाया गया. 

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले मिश्रा 1967 बैच के आईएएस अफसर हैं. प्रशासनिक सेवा के दौरान वे ट्राइ के चेयरमैन, टेलिकॉम विभाग के सचिव जैसे प्रमुख पद पर रह चुके हैं. 

चंपत राय- विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के महासचिव हैं. बतौर महासचिव उनका काम प्रबंधन का भी है. महासचिव होने के नाते राय ही ट्रस्ट की तरफ से राम मंदिर निर्माण की निगरानी भी कर रहे हैं. 

मंदिर निर्माण के बारे में हर अपडेट राय ही मीडिया को देते हैं. यानी मंदिर निर्माण के हर फैसले में राय की अहम भूमिका रहती है. निर्माण से संबंधित हर रिव्यू मीटिंग में राय मौजूद रहे हैं.

राय कोर्ट में रामलला के पैरोकार भी रहे हैं. राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में रामेश्वर प्रसाद बंसल और सावित्री देवी के घर पर हुआ था.

बचपन में ही राय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद ये धामपुर के आश्रम में डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए और नौकरी करने लगे.

हालांकि, आपातकाल के वक्त उन्हें पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया. जेल से जब राय निकले, तो उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी. इसके बाद वे संघ के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने लगे

इसी बीच मंदिर आंदोलन ने तुल पकड़ लिया. विश्व हिंदू परिषद ने 1991 में उन्हें अयोध्या का संगठन प्रभारी बनाया. यह वह वक्त था, जब मंदिर आंदोलन में 28 हिंदू कार्यकर्ता मारे गए थे.

राय ने सभी लोगों को एकजुट किया और मंदिर आंदोलन में धार देना शुरू कर दिया. बाबरी विध्वंस के बाद मामला पूरी तरह कोर्ट चला गया. सरकार नहीं होने की वजह से वीएचपी के कार्यकर्ताओं की धड़पकड़ शुरू होने लगी.

ऐसे वक्त में राय ने धैर्य दिखाते हुए कोर्ट की सभी तारीखें ढोई. निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक रामलला की लड़ाई लड़ी. 

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