मोदी के 'सेमी कंडक्टर अभियान' को UP से मिला बड़ा बूस्ट, पूरे देश के लिए खास है योगी सरकार का ये फैसला


लखनऊ
: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार कैबिनेट मीटिंग में सेमी कंडक्टर नीति 2024 को मंजूरी दी। अभी तक सिर्फ गुजरात, ओडिशा और तमिलनाडु ने इसे लेकर नीति बनाई थी। यूपी चौथा राज्य है, जहां सेमी कंडक्टर नीति 2024 बनाई है। जानकारों का मानना है कि योगी सरकार अगर इस नीति का जमीन पर उतार पाती है तो यूपी ही नहीं देश के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। सरकार का भी मानना है कि इससे बड़े पैमाने पर यूपी में इन्वेस्टमेंट आएगा। योगी सरकार की कोशिश है कि सेमी कंडक्टर निर्माण सेक्टर में उत्तर प्रदेश लीडर बने। इस पॉलिसी के आने के साथ ही क्यों इतनी उम्मीदें बंध गईं, आइए विस्तार से समझते हैं।

क्या है सेमी कंडक्टर

आपके हाथ में जो मोबाइल है, जिस गाड़ी से आप चलते हैं, लैपटॉप से लेकर तमाम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल होता है। सिलिकॉन से बनी इस बेहद छोटी सी चिप के बिना सब थम जाएगा। न आपको एटीएम से पैसा मिलेगा न ही फैक्ट्रियों में कोई प्रोडक्शन हो पाएगा। यही कारण है कि सेमीकंडक्टर को आज 21वीं सदी का 'न्यू ऑयल' भी कहा जाता है। जो भी देश इसमें अग्रणी होगा, वह अपने आप सबसे ताकतवर बन जाएगा। वर्तमान में ताइवान, चीन और अमेरिका की कंपनियां इन सेमीकंडक्टर की सबसे बड़ी निर्यातक हैं।

भारत के सामने चुनौती

वैसे तो भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में शुमार है। डिजिटलाइजेशन में भारत नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। लेकिन कड़वा सच ये है कि जैसे तेल के मामले में हम आयात पर निर्भर हैं, उसी तरह सेमीकंडक्टर भी हम आयात ही करते हैं। देश की कई कंपनियां इन चिप की डिजाइनिंग, पैकेजिंग और टेस्टिंग में जरूर योगदान देती हैं लेकिन असल में सेमीकंडक्टर यूरोप, अमेरिका या ताइवान चीन में ही बनती हैं। भारत में खपत की बात करें तो जानकारों के अनुसार 2030 से अकेले भारत में सेमीकंडक्टर की खपत 110 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।

इसी चुनौती से निपटने के लिए मोदी सरकार ने पिछले कुछ समय से सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। पिछले साल गुजरात के गांधीनगर में सेमीकॉन इंडिया 2023 सम्मेलन में पीएम ने सेमीकंडक्टर उद्योग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर बनाने की सुविधा स्थापित करने के लिए कंपनियों को 50 फीसदी वित्तीय सहायता दी जाएगी। यही नहीं उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर के लिए एक ईको सिस्टम डेवलप कर रहा है, ताकि ये उद्योग तेजी से बढ़ सके।

बता दें इस संबंध में सरकार को कई एक्सपर्ट कंपनियों से फीडबैक मिला कि देश में सेमीकंडक्टर उद्योग स्थापित करने के लिए राज्यों और केंद्र को मिलकर इको सिस्टम तैयार करना होगा। ताकि फैक्ट्री लगाने से लेकर हर काम के लिए एक स्पष्ट नीति सामने आए।

केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तो देश से वादा भी कर दिया है कि 2024 में दिसंबर तक पहली मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर चिप पेश कर दी जाएगी। इससे देश में मोबाइल से लेकर तमाम उपकरणों की कीमतें भी गिरेंगी। गुजरात में इस पर काम भी शुरू हो चुका है।

यूपी सरकार से मिलेगी 75 फीसदी की सब्सिडी

अब यूपी भी गुजरात के साथ इस सेमीकंडक्टर रेस में शामिल हो गया है। योगी सरकार की नीति के बारे में कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय कहते हैं कि सेमी कंडक्टर निर्माण इकाई लगाने वाले उद्योग समूहों को भारत सरकार की ओर से 80 हजार करोड़ रुपए का फंड दिये जाने की व्यवस्था है। यूपी सरकार इसमें 75 प्रतिशत की भागीदारी करेगी। पॉलिसी में उद्योगों को वित्तीय प्रोत्साहन देने की भी व्यवस्था है। इसमें लैंड सब्सिडी के रूप में 200 एकड़ तक 75 फीसदी की सब्सिडी मिलेगी।

उन्होंने बताया कि अब तक 13 कंपनियों ने प्रदेश में सेमी कंडक्टर निर्माण इकाई लगाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है। उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में पानी और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट कराने पर 10 लाख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट कराने के लिए यूपी सरकार 20 लाख रुपए प्रदान करेगी। यही नहीं इस इंडस्ट्री को स्किल्ड मैनपॉवर उपलब्ध कराने के लिए इंडस्ट्री से सीएम इंटर्नशिप प्रोग्राम के तहत कोलैबरेशन किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के टेक्निकल इंस्टीट्यूटों में भी सेमी कंडक्टर निर्माण से संबंधित ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी।

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