गरीब किसान-मजदूर कमरतोड़ मेहनत कर सकते हैं, तो डिस्काउंट पर पढ़े-लिखे युवक क्यों नहीं: नारायणमूर्तिnarayana-murthy

 


इंफोसिस के फाउंडर और अरबपति नारायण मूर्ति (Narayana Murthy) ने सप्ताह में 70 घंटे काम करने वाले बयान पर फिर से बात की है। एनआर नारायण मूर्ति (Narayana Murthy) के इस बयान पर कुछ महीने पहले काफी विवाद हुआ था। अब मूर्ति ने अपने इस बयान का बचाव करते हुए एक इंटरव्यू में कहा कि देश में किसान और कारखानों में काम करने वाले मजदूर कमरतोड़ मेहनत करते हैं। ऐसे में देश की पढ़ी-लिखी आबादी को बहुत ज्यादा मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादा काम करना सामान्य बात है। देश में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो शारीरिक श्रम से पैसे कमाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस देश में कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि गरीब किसान और मजदूर बहुत मेहनत करते हैं।

वह कम पढ़े-लिखे होते हैं और देश की तरक्की में योगदार दे रहे हैं। वे भारत के कम भाग्यशाली नागरिक हैं। देश और सरकार को उन लोगों को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने भारी छूट पर शिक्षा हासिल की है। इसलिए जिन लोगों ने भारी डिस्काउंट पर शिक्षा हासिल की है, उन्हें अब देश के गरीबों के लिए ज्यादा कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।

दोस्त और एनआरआई हैं खुश

नारायण मूर्ति ने कहा कि सोशल मीडिया पर बहुत सारे रिएक्शन के बाद भी उनके कई पश्चिमी देशों के दोस्त और एनआरआई इस बयान से खुश हैं। उन्होंने कहा कि कभी बिना खुद किए किसी और को सलाह नहीं दी है। नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति ने कहा था कि इंफोसिस में नारायण मूर्ति सुबह 6 बजे से काम शुरू करते थे और रात 9 बजे तक काम खत्म कर देते थे। इस दौरान वह अक्सर एक दिन में 12 घंटे से ज्यादा समय तक काम करते थे। कई सप्ताह तक उन्होंने ऐसे ही काम किया है।

खुद किया 90 घंटे तक काम

नारायणमूर्ति ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने सेक्टर में उनसे बेहतर है तो वह उसका सम्मान करते हैं। वह अगर उनसे पूछेंगे कि क्या उन्होंने जो बात कही है वह गलत है। ऐसा नहीं लगता। नारायणमूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति ने कहा था कि नारायणमूर्ति भले ही 70 घंटे काम करने की सलाह दे रहे हों, लेकिन वह खुद सप्ताह में 90 घंटे तक काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह नारायणमूर्ति के लिए सामान्य बात रही है। नारायणमूर्ति ने कहा कि यह उनका रूटीन था कि सप्ताह में 85 से 90 घंटे तक काम किया जाए। उन्होंने कहा कि वह 6 या साढ़े छह दिन काम करते ही थे।

दिया था ये बयान

इंफोसिस के फाउंडर ने बीते साल 2023 में एक पॉडकास्ट पर कहा था कि भारत की कार्य उत्पादकता दुनिया में सबसे कम है। उन्होंने युवाओं से अपील की थी कि अगर हमें चीन जैसे देश से आगे निकलना है तो हर सप्ताह 70 घंटे तक काम करने की आदत रखनी होगी। जापान और जर्मनी ने ऐसा किया था। कई प्रोफेशनल्स और सीईओ ने उनके बयान की आलोचना की थी। इस बयान के बाद ग्लोबल बहस छिड़ गई थी।

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