INDW vs ENGW: भारत ने इंग्लैंड को हराकर दर्ज की टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी जीत, दीप्ति ने झटके 9 विकेट


MUMBAI:
भारतीय महिला टीम ने नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए एकमात्र मैच में इंग्लैंड को 347 रनों से हराकर महिला टेस्ट क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है. भारत की जीत की हीरो रहीं दीप्ति शर्मा जिन्होंने मैच में कुल 9 विकेट हासिल किए. भारत ने इंग्लैंड को इस मैच को जीतने के लिए 478 रनों का विशाल लक्ष्य दिया था. इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में 131 रनों पर सिमट गई. एकमात्र टेस्ट के तीसरे दिन के पहले सेशन में ही भारत ने इंग्लैंड के सभी 10 विकेट हासिल किए और मैच अपने नाम किया.

भारत ने मैच में पहली पारी में 428 रन बनाए थे. भारत के लिए शुभा सतीश ने 69, रॉड्रिक्स ने 68, यास्तिका भाटिया ने 66, दीप्ति शर्मा ने 67 रनों की पारी खेली थी. इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 136 रन ही बना पाई. दीप्ति शर्मा ने पहली पारी में भारत के लिए 5.3 ओवरों में 7 रन देते हुए 5 विकेट हासिल किए थे. भारत ने पहली पारी के आधार पर इंग्लैंड पर 292 रनों की बड़ी लीड हासिल की थी.

भारत के पास इंग्लैंड को फॉलोऑन देने का मौका था, लेकिन टीम ने ऐसा नहीं किया. इसके बाद टीम इंडिया ने 6 विकेट के नुकासन पर 188 रनों के स्कोर पर अपनी दूसरी पारी घोषित की. वहीं तीसरे दिन बल्लेबाजी को उतरी इंग्लैंड को मैच जीतने के लिए इतिहास रचना था, लेकिन इंग्लैंड ऐसा नहीं कर पाई. भारतीय गेंदबाजों ने तीसरे दिन शानदार प्रदर्शन किया और पहले ही सेशन में इंग्लैंड की पूरी टीम को पवेलियन भेज दिया. इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में 27.3 ओवरों में 131 रन ही बना पाई. भारत के लिए दूसरी पारी में दीप्ति शर्मा ने 4 और पूजा वस्त्राकर ने 3 विकेट हासिल किए.

महिला टेस्ट में 300 से अधिक रनों की जीत का यह दूसरा मौका है. इससे पहले टेस्ट इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड श्रीलंका के नाम था, जिसने पाकिस्तान को 1998 में 309 रनों के बड़े अंतर से हराया था. यह इंग्लैंड के खिलाफ घर पर भारत की पहली टेस्ट जीत भी है.

भारत ने पहली पारी में टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए 428 रन बनाए थे और यह टेस्ट इतिहास का पहली पारी का दूसरा सर्वाधिक स्कोर है, जबकि भारत का यह टेस्ट की पहली पारी का सर्वाधिक स्कोर है. भारत ने इस मैच में पहली पारी में 4.09 की रन रेट से रन बनाए और महिला टेस्ट के इतिहास में यह पहला मौका था, जब कोई टीम 4 से अधिक के रन रेट से रन बनाने में सफल हुई हो.
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