धर्मसंकट में विपक्ष...राम मंदिर जाने या न जाने पर फंसा I.N.D.I.A गठबंधन! बीजेपी ने कसा तंज

 


अयोध्‍या में 22 जनवरी को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का बहुप्रतीक्षित अभिषेक, जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जैसे कई प्रमुख लोगों की उपस्थिति होगी, यह धार्मिक घटनाक्रम 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. ‘प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव’ को लेकर नेताओं, धार्मिक साधु- संतों और कई दिग्‍गजों को निमंत्रण भेजा गया है. यह विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया है जो चर्चा पैदा कर रही है. केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि सभी को निमंत्रण भेजा गया था (लेकिन) केवल वे ही आ पाएंगे जिन्हें भगवान राम ने बुलाया है.


सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात ने कहा कि ‘धार्मिक कार्यक्रम का राजनीतिकरण’ किया जा रहा है. पूर्व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके ‘भगवान राम मेरे दिल में हैं’, और इसलिए वह ‘कार्यक्रम’ में शामिल नहीं होंगे. इस पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने भाजपा के प्रतिद्वंद्वियों, खासकर उन लोगों पर तंज कसा है. उन्होंने कहा, ‘जो हमारा मजाक उड़ाते थे… अब, यदि आपमें साहस है, तो अयोध्या आएं और हम आपको मंदिर दिखाएंगे.

कांग्रेस बोली-  22 जनवरी को पता चलेगा कि पार्टी क्‍या करेगी

निवर्तमान लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी आमंत्रित किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि राहुल गांधी को निमंत्रण मिला या नहीं. वहीं कांग्रेस पार्टी ने निमंत्रण के संबंध में अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है. पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने निमंत्रण की पुष्टि की लेकिन संवाददाताओं से कहा कि आपको पार्टी के रुख के बारे में बताया जाएगा…आपको 22 जनवरी को पता चलेगा. उन्होंने (भाजपा) हमें आमंत्रित किया है. हमें आमंत्रित करने के लिए हम बहुत आभारी हैं.

सीपीआई (एम) महोत्‍सव में शामिल नहीं होगी

News18 से बात करते हुए, बृंदा करात ने पुष्टि की कि सीपीआई (एम) भगवान राम के लिए ‘प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव’ में भाग नहीं लेगी. इस कार्यक्रम में न तो वह और न ही पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी शामिल होंगे. उन्‍होंने कहा कि ‘नहीं…, हम नहीं जाएंगे. हम धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हैं… लेकिन वे एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ रहे हैं.’ करात ने कहा कि ‘धर्म को राजनीतिक हथियार के रूप में या राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है.’

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